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Showing posts from January, 2021

खुदा बना बैठे हैं

सब कुछ, बर्बाद कर रहे हैं, चंद लोग,  जो दौलत को, खुदा बना बैठे हैं.. कुदरत की बनाई दुनिया को,  लेन देन का, बाज़ार बना रखे हैं... खामोश खड़े, पर्बत जंगल, काट कर,  शोरगुली, कारखाने बना रखे हैं.. हवाओं को ज़हरीला बनाकर, इसकी ताज़गी को लुटे हैं.. देह को व्यापार बनाकर इसकी पाकीज़गी को लुटे हैं.. इस पर क़यामत ये है,  हम इनको खुदा बना बैठे हैं.. सब कुछ, बर्बाद कर रहे हैं, चंद लोग,  जो दौलत को, खुदा बना बैठे हैं.. - सत्यदेव - मेघ

नियम

देखा होगा, इन दरख्तों ने भी बहारों का मौसम, जाते हुए है देखा नहीं, इनको मगर इंसानों की तरह, रोते हुए  सुलग जाता है, सागर भी बारिश बनके  बरसने  के लिए,  इंसानों को,  बहोत  कम देखा है, यूं दरियादिली दिखाते हुए.. है छुप जाता, सूरज भी, रातों की, चांदनी के लिए, देखा है बस, कुछ लोगों को ही, यूं छुप कर भी जगमगाते हुए है नियम अनगिनत, बनाती ये दुनिया, बनाके इनको, है मिटाती ये दुनिया, है डरती मगर, ये कुदरत के, नित्य नियम पे चलते हुए.. देखा होगा, इन दरख्तों ने भी बहारों का मौसम, जाते हुए है देखा नहीं, इनको मगर इंसानों की तरह, रोते हुए - सत्यदेव - मेघ

मुनाफा

हर रोज़ दुकान खोलता हूँ, हर रोज़ मुनाफा हो, ये ज़रूरी नहीं, बेचने को, बहोत सामान पड़ा है, हर सामान बेचूं, ये ज़रूरी नहीं, बरनी में रखी, मीठी गोलिया, यूंही दे कर, बच्चों की मुस्कान में सुकून पाता हूं। जीवन के, बही खाते में, इस तरह, कुछ मुनाफा कर लेता हूँ.. - सत्यदेव - मेघ

चलचित्र

ये जीवन मुझे, सारा अपना... चलचित्र सा है नज़र आता.. अभिनेता नहीं उसमें, स्वयं को, हूँ मूक दर्शक सा मैं नज़र आता.. होना था जो, वही है हुआ, मैं कितना भी जतन करता उम्मीदों की, नाव में बैठा,  चाहे, जितना भी भ्रमण करता.. मर्ज़ी से, आते नहीं जग में, न अपनी, मर्ज़ी से हम जाते,  जीवन का ये भेद जानकर  फिर क्यों हम अहम् जगाते.. ये जीवन मुझे, सारा अपना... चलचित्र सा है नज़र आता.. अभिनेता नहीं उसमें, स्वयं को, हूँ मूक दर्शक सा मैं नज़र आता.. - सत्यदेव - मेघ

दरवाज़ा

रिश्तों के मौसम, जब सर्द  हों ,  थोड़ी गर्माहट, फिर भी रहे,  तो अच्छा है.. बातों की, जब गुंजाईश न हो,  दिलों में फिर भी, दुआ रहे,  तो अच्छा है.. क्या पता, कोई अपना, कब दस्तक दे जाये,  बंद दरवाज़ा, थोड़ा खुला रहे,  तो अच्छा है.. - सत्यदेव - मेघ

धुन

कहत 'मेघ', सुन ओ मानुष,  जो धन की धुन में, जायेगा,  खुशहाली देकर तुझसे, चैन का,  मोती, ये ले जायेगा.. सच की खोज में, चला अगर तू, ज्ञान का अमृत पायेगा,  जीवन की, इस धुप में तपकर,  तू 'सत्यदेव' कहलायेगा.. - सत्यदेव - मेघ

पिंजरा

है सोने का, मगर पिंजरा है ये..  रौशनी को बुझा दे, वो कोहरा है ये..  काँटों भरा, सर पे सेहरा है ये..  आज़ादियों पे, पहरा है ये.. है सोने का, मगर पिंजरा है ये..  The joy of doing something seems to be disappearing from our workplaces. Majority  of us seem to be dragging on, in our jobs. चल रहा है. We try to perform well out of compulsion, competition. Not out of motivation. We earn, we eat, we drink, we tour, we shop. We work like horses for five days of the week, to enjoy two days of weekend. We work hard for whole year, to enjoy a couple of weeks of holidays. And we wish, the weekend never ends, holiday never ends. We think we are free. But the freedom seems like a leash (पट्टा) tied to a pet dog. The dog is free to go only that far.  We are all under the spell, cast by the world. And we are the world. We have made money, the most important thing in this world. When I did not have a job, I yearned for one. Now, when I have one, I yearn for happiness, satisfa...

नोकीले

बहुत  चुभी थी, आज भी याद है मुझे... वो सार्कास्टिक हँसी तेरी, सोचता हूँ, ऐसा क्यूं हुआ था, मैने तो प्यार किया था, तूने, ना जाने क्यूं , वार किया था.. No, this is not a love poetry. It is a tribute to people who have the innate ability to form opinion about others. Some even  have the ability to give you a   piece of their sarcastic attitude, when you meet/communicate with them, making you feel, as if your existence is a joke :-) A great revered saint had said 'never judge people'. None. You never know, what circumstances make them do, what they do. World is a complicated place. The funniest looking person, might be hiding the most serious tragedy in his heart. I choose to remain sensitive to such attitude. As it reminds me to avoid doing the same to others. Thanks. - सत्यदेव - मेघ

खूबसूरत उदासी

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Source  https://fineartamerica.com/featured/natalia-vodianova-rahul-verma.html कितनी खूबसूरत, ये उदासी है.. कोई अधूरी सी आरज़ू में,  इन गेहरी नीली आँखो ने, मानो, सारी ज़िन्दगी गुज़ारी है.. या फिर, कुदरत ने ही, पहले से  तेरी सूरत, यूँ संवारी है.. ज्यूँ भी देखूं, इस बात को,  ये बात, बहुत ही न्यारी है.. तेरी  सूरत, बहुत ही प्यारी है.. 'Eyes speak volumes'.  Her eyes seem to have a tinge of sadness in them. As if life has been tough and lonely for her. As if there has been an unfulfilled desire since years. The sketch shows the beauty as well as sadness in her eyes. Which inspired me to write above lines. The beautiful sketch is drawn  by one of my amazing friends, Ganesh Kalikar.  Thanks for reading.. - सत्यदेव - मेघ

यूंही..

उसके आने के इंतज़ार में, न जाने कितने बरस, यूंही बीत गए, उसके इंतज़ार में। दुनिया चलती रही, बस, मैं ही ठहरा रहा, उसके इंतज़ार में। उम्मीद थी मेरे अपनों को मुझसे, पर सब छोड़ कर, मैं यूंही बैठा रहा, उसके इंतेज़ार में। कुछ लोग, वक्त के आगे निकल गए, कुछ वक्त के साथ चलते रहे, और मैं, वहीं पर रुका रहा, उसके आने के इंतेज़ार में। उम्र गुजर गई, नादान मोहब्बत में, अब जिंदगी का सफर खत्म होने को है, तब जाके समझा, कितने अपनों को खो दिया, उसके आने के इंतेज़ार में। नजाने कितने बरस, यूंही बीत गए, उसके इंतज़ार में। Man falls in love, but often fails to come out of fallen & forgotten love. प्यार की उम्र लम्बी होती है, पर उस रिश्ते की उम्र इतनी लंबी ना भी हो. By continuing to hold on to such love, one degrades the idea of such pure emotion called love.  Life will give indications that it's not working out. That's the time to come out of it. Let the love stay. But you must move on. Thanks for reading. - सत्यदेव - मेघ