धुन

कहत 'मेघ', सुन ओ मानुष, 
जो धन की धुन में, जायेगा, 
खुशहाली देकर तुझसे, चैन का, 
मोती, ये ले जायेगा..

सच की खोज में, चला अगर तू,
ज्ञान का अमृत पायेगा, 
जीवन की, इस धुप में तपकर, 
तू 'सत्यदेव' कहलायेगा..


- सत्यदेव - मेघ

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