खुदा बना बैठे हैं

सब कुछ, बर्बाद कर रहे हैं, चंद लोग, 
जो दौलत को, खुदा बना बैठे हैं..

कुदरत की बनाई दुनिया को, 
लेन देन का, बाज़ार बना रखे हैं...

खामोश खड़े, पर्बत जंगल, काट कर, 
शोरगुली, कारखाने बना रखे हैं..

हवाओं को ज़हरीला बनाकर,
इसकी ताज़गी को लुटे हैं..

देह को व्यापार बनाकर
इसकी पाकीज़गी को लुटे हैं..

इस पर क़यामत ये है, 
हम इनको खुदा बना बैठे हैं..

सब कुछ, बर्बाद कर रहे हैं, चंद लोग, 
जो दौलत को, खुदा बना बैठे हैं..


- सत्यदेव - मेघ

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