चल, निभा लेते हैं ये रिश्ते
तेरी मेरी मर्ज़ी से, जुड़े थे ये रिश्ते,
अब इस मर्ज़ी के, मोहताज नहीं ये रिश्ते
अब इस मर्ज़ी के, मोहताज नहीं ये रिश्ते
तू मुझसे, या मैं तुझसे, कितना भी झगड़ लूँ,
इस तकरार से, नहीं डगमगाते ये रिश्ते,
हम दोनों के अहम् की, दीवार, ऊँची है बहोत,
इन दीवारों से भी खूब, ऊँचे, हो गए हैं ये रिश्ते..
बात सिर्फ तेरी मेरी, अब रही कहाँ है,
इस रिश्ते में से, कई, और बन चुके हैं रिश्ते..
इसी बात पे, मेरे हाथ में अपना हाथ रख दे,
लड़ते झगड़तेे सही, चल निभा लेते हैं ये रिश्ते..
- सत्यदेव - मेघ
Rishton mein graduation ker li!!
ReplyDelete:D badhiya line hai. Rishton mei graduation kar li. Did you possibility of poetry here? Add few more lines. You know, this appeals to youth very much - less heavy words.
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