मेरा भारत

अखंड है, प्रचंड है, 
हम सब का तू घमण्ड है..

तू आसमां अनंत है, 
हम झूमते विहंग हैं..

तू डोर एक प्रेम की,
ये जग तेरी पतंग है..

तेरे ज्ञान की विरासतों पे 
विश्व सारा दंग है..

तेरा नाम है उदारता,
अध्यात्म तेरा ढंग है..

तू विश्व के इस चित्रपट पे, 
खास एक प्रसंग है..

सहे चारों ही दिशा से तूने
घात कुछ प्रचंड हैं..

पर गर्व तुझपे है के तू, 
बेढंग ना दबंग है..

वर्षों से एकता तेरी, 
सम्पूर्ण है अभंग है..

रहते सभी मिलकर यहां,
जितने भी सारे खंड हैं..

ऐसा नहीं के सब यहाँ,
ठीक है, सुढंग है..

चल रही है आज भी 
दरिद्रता से जंग है..

हैवानियत का फिर कभी, 
जागता भुजंग है..

हम जानते हैं, ये तेरी
महानता का भंग है..

तो उठ ओ देशवासी, इसका 
करना कुछ प्रबंध है..

ख़त्म कर इसे अभी, 
तेरे मन में जो भी द्वन्द है..

होने न दें, फीका कभी, 
ध्वजाओं का जो रंग है..

वतन के कोने कोने में,
लगाना राम रंग है..

तू अंग है इस देश का,
ये देश तेरे संग है..


- सत्यदेव - मेघ

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