मुनाफा
हर रोज़ दुकान खोलता हूँ,
हर रोज़ मुनाफा हो, ये ज़रूरी नहीं,
हर रोज़ मुनाफा हो, ये ज़रूरी नहीं,
बेचने को, बहोत सामान पड़ा है,
हर सामान बेचूं, ये ज़रूरी नहीं,
बरनी में रखी, मीठी गोलिया, यूंही दे कर,
बच्चों की मुस्कान में सुकून पाता हूं।
जीवन के, बही खाते में,
इस तरह, कुछ मुनाफा कर लेता हूँ..
- सत्यदेव - मेघ
Wah, kya soch hai! Bahut hi nek iraada hai😀
ReplyDelete:D thanks
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