यूंही..

उसके आने के इंतज़ार में,
न जाने कितने बरस, यूंही बीत गए,
उसके इंतज़ार में।

दुनिया चलती रही,
बस, मैं ही ठहरा रहा,
उसके इंतज़ार में।

उम्मीद थी मेरे अपनों को मुझसे,
पर सब छोड़ कर, मैं यूंही बैठा रहा,
उसके इंतेज़ार में।

कुछ लोग, वक्त के आगे निकल गए,
कुछ वक्त के साथ चलते रहे,
और मैं, वहीं पर रुका रहा,
उसके आने के इंतेज़ार में।

उम्र गुजर गई, नादान मोहब्बत में,
अब जिंदगी का सफर खत्म होने को है,
तब जाके समझा, कितने अपनों को खो दिया,
उसके आने के इंतेज़ार में।

नजाने कितने बरस, यूंही बीत गए,
उसके इंतज़ार में।

Man falls in love, but often fails to come out of fallen & forgotten love. प्यार की उम्र लम्बी होती है, पर उस रिश्ते की उम्र इतनी लंबी ना भी हो. By continuing to hold on to such love, one degrades the idea of such pure emotion called love. 

Life will give indications that it's not working out. That's the time to come out of it. Let the love stay. But you must move on.

Thanks for reading.

- सत्यदेव - मेघ

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